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आयुर्वेद का अर्थ,परिभाषा,प्रयोजन एवं कार्य (Definition of ayurveda)

⏪आयुर्वेद⏭ आयुर्वेद जीवन का वह शास्त्र है जिसमें आयु से संबंधित सभी उपस्थिति एवं नाश का वर्णन किया जाता है।
आयुर्वेद दो शब्दों के संयोग से बना है।                          आयु+वेद                       आयु=जीवन (life)                            वेद=विज्ञान(science) जीवन का विज्ञान (science of life) ही आयुर्वेद है।  
आयु ➤ जीवित शरीर के जन्म से लेकर मृत्यु तक के समय को आयु कहते है आयु चार प्रकार की होती है- १. हितायु २. अहितायु ३. सुखायु ४. दुखायु  हितायु ➢सर्वजन हितैषी,निर्लोभी ,शांत,विवेकी, जागरूक,धर्म,अर्थ,काम का संतुलन, बड़ों का आदर करने वाला, मनोविकार(काम-क्रोध-मद-मान-राग-द्वेष आदि)रहित, सहिष्ण,स्मृतिवान और बुद्धिमान व्यक्ति हितायु होता है।अहितायु➣हितायु के विपरीत व्यक्ति अहितायु होता है।सुखायु➢शरीर व मानस  रोग से मुक्त ,युवावस्था सम्पन्न ,बल-वीर्य-यश से सम्पन्न उच्च मनोबल वाला ,जन-धन से सम्पन्न ,जीवन उपयोगी साधन सम्पन्न संतुष्ट और स्वतंत्र व्यक्ति सुखायु कहलाता है। दुखायु ➣रोगी, वृद्ध,असमर्थ ,निर्बल, हीनमनोबल,विकलांग, साधनहीन,और परतंत्र व्यक्ति दुखायु कहलाता है।  वेद ➤ वेद शब्द विद् …

आयुर्वेद अवतरण या आयुर्वेद की रचना किसने की ? (Who created the Ayurveda?)

आयुर्वेद  आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन वैदिक चिकित्सा पद्धति है जिस का अवतरण आयुर्वेद में कुछ इस प्रकार बताया गया है।

 १. सृष्टि की उत्पत्ति से पहलेब्रह्मा जी ने आयुर्वेद की रचना की थी।    २ . ब्रह्मा जी ने आयुर्वेद का उपदेश(मौखिक ज्ञान मंत्र के रूप में ) दक्ष प्रजापति जी को दिया।    ३.   दक्ष प्रजापति ने अश्वनी कुमार को आयुर्वेद का उपदेश दिया।   ४.   अश्वनी कुमार ने यह उपदेश इंद्रदेव को दिया।        ब्रह्मा जी से देवराज इंद्र तक सभी को काय और शल्य दोनों ही चिक्त्सािओं का ज्ञान था।  किन्तु इंद्रदेव ने काय चिकित्सा का ज्ञान महर्षि भारतद्वाज और शल्य चिकित्सा का ज्ञान भगवान धनवंतरी को दिया। जो आगे जाकर दो संप्रदाय में विभाजित हुआ।
                          काय में आत्रेय सम्प्रदाय(आत्रेय ,अग्निवेष, चरक) ─ प्रमुख ग्रन्थ चरक संहिता                            शल्य में धन्वंतरी संप्रदाय(धनवंतरी, वृद्ध सुश्रुत, सुश्रुत) ─ प्रमुख ग्रन्थ सुश्रुत संहिता • आयुर्वेद कायचिकित्सा अवतरण ፦१.   इन्द्र देव ने यह  उपदेश महर्षि भारतद्वाज को दियाजो पृथ्वी लोक पर पहले व्यक्ति थे जिन्हें आयुर्वेद का ज्ञानप्र…